हम प्रेम से सबको जोड़ेंगे, मर्यादा को नहीं तोड़ेंगे
हम प्रेम से सबको जोड़ेंगे, मर्यादा को नहीं तोड़ेंगे। संकट कैसा भी विकट घना, कर्तव्य डगर ना छोड़ेंगे ।। है प्रेम-प्रभु गहरा नाता, अविरल अमृत रस छलकाता। आनंद लहर लहराते है, सत पथ से मुख ना मोड़ेंगे ।। 1।। है प्रेम-सुखद जीवन धारा, हरती है द्वेष क्लेश सारा। आदर्शों के हम अनुगामी, मृदु सत्य वचन ही बोलेंगे ।। 2।। है प्रेम-प्रेरणा का सागर, करुणा से अपनी भर गागर। हर प्राण-प्राण हर कण कण में, उत्साह उमंगे घोलेंगे ।। 3।। है प्रेम-एकता की जननी, अनुपम वैविध्य लिए धरणी। दिव्यांश सभी में जग मग जग, वैभव के नव पथ खोलेंगे ।। 4।।