भरत भूमि की दशो दिशा में, समरसता का गान हो

 
भरत भूमि की दशो दिशा में, समरसता का गान हो 
एक ही मंदिर, एक जलाशय, सबका एक श्मशान हो 
समरसता का गान हो .......................................

हिन्दू सगे है भाई-भाई, कभी पतित नहीं होते है 
रामकृष्ण के वंशज है सब इस पर गर्वित होते है 
छुआछूत का भेद मिटा दे, सब वर्गों का मान हो
एक ही मंदिर, एक जलाशय, सबका एक श्मशान हो 
समरसता का गान हो .......................................

छुआछूत यदि पाप नहीं तो, जग में कुछ भी पाप नहीं 
हिन्दू सहोदर भटक गया तो, इससे बड़ा अभिशाप नहीं 
मान जिनका भांग हुआ हो, अब उनका सम्मान हो 
एक ही मंदिर, एक जलाशय, सबका एक श्मशान हो 
समरसता का गान हो .......................................

नर सेवा नारायण सेवा, मन्त्र का जग में गुंजन हो 
समरसता का भाव पले, एकलव्य का वंदन हो 
कृष्ण सुदामा के घर आये, इसका हमें अभिमान हो 
एक ही मंदिर, एक जलाशय, सबका एक श्मशान हो 
समरसता का गान हो .......................................



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