आओ हम सब भारतवासी चले इस डगरिया

आओ हम सब भारतवासी चले इस डगरिया 

पांच प्रणो से हम-सब लाये, इक नई उजरिया   


समरसता सद्भाव जगाने घर घर अलख जगानी है 

हिन्दू न कोई ऊंचा-नीचा, सभी सहोदर भाई है 

एक रहेंगे सेफ रहेगे, समझे यह नजरिया 

आओ हम सब भारतवासी चले इस डगरिया

पांच प्रणो से हम-सब लाये, इक नई उजरिया   ।।१।।


पानी-पर्वत-पेड़-प्रकृति-पर्यावरण बचायेगे 

सिंगल यूज प्लास्टिक को हम कभी नहीं अपनायेगे 

हरी-भरी सुन्दर धरती कर, बढ़ाये हम उमरिया 

आओ हम सब भारतवासी चले इस डगरिया

पांच प्रणो से हम-सब लाये, इक नई उजरिया   ।।२।।


स्व का भाव जगेगा भारत, विश्वगुरु बन जाएगा 

स्वावलंबन से स्वदेश का, वैभव बढ़ता जायेगा 

भारत माँ सिर मुकुट सजेगा, स्वदेशी चुनरियाँ 

आओ हम सब भारतवासी चले इस डगरिया

पांच प्रणो से हम-सब लाये, इक नई उजरिया   ।।३।।


आधुनिकता के इस युग में, नैतिकता ना होवे कम 

भाषा-भूषा-भवन-भ्रमण में संस्कार ना भूले हम 

मिल-जुल-कर परिवार रहे ज्यों, फूलो की टोकरियाँ 

आओ हम सब भारतवासी चले इस डगरिया

पांच प्रणो से हम-सब लाये, इक नई उजरिया   ।।४।।


अनुशासन पालन करने से, परिवर्तन आ जायेगा 

जन-जन यह दायित्व समझकर, अपना धर्म निभायेगा 

देश की नौका पार लगाये, बन कर के खेवटिया 

आओ हम सब भारतवासी चले इस डगरिया

पांच प्रणो से हम-सब लाये, इक नई उजरिया   ।।५।।

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