हम विजय की ओर बढते जा रहे संगठन का भाव भरते जा रहे

 हम विजय की ओर बढते जा रहे
संगठन का भाव भरते जा रहे
 
यह सनातन राष्ट्र मंदिर है यहाँ
वेद की पावन ऋचाये गूंजती
प्रकृति का वरदान पाकर शक्तियाँ
देव निर्मित इस धरा को पूजती
हम स्वयं देवत्व गढ़ते जा रहे
हम विजय की ओर बढते जा रहे
 
राष्ट्र की जो चेतना सोइ पड़ी
हम उसे फिर से जगाने आ गये
परम पौरुष की पताका हाथ ले
क्रान्ति के नव गीत गाने आ गए
विघ्न बाधा शैल चढ़ते जा रहे
हम विजय की ओर बढते जा रहे
 
हम युवाओ का करे आव्हान फिर
शक्ति का नवज्वार पैदा हो सके
राष्ट्र रक्षा का महाअभियान ले
संगठन भी तीव्रगामी हो सके
लक्ष्य का संधान करते जा रहे
हम विजय की ओर बढते जा रहे
 
हम विजय की ओर बढते जा रहे
संगठन का भाव भरते जा रहे

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