Posts

जाग उठा है हिन्दू ह्रदय में विश्वविजय विश्वास

जाग उठा है हिन्दु ह्रदय में विश्व विजय विश्वास जाग उठा है हिन्दु ह्रदय में विश्व विजय विश्वास करवट बदल रहा है देखो भारत का इतिहास सदियों से विस्मृत गौरव का भारत माँ परिचय देगी सौम्य शांत सुखदायी जननी नवयुग नवजीवन देगी उस जीवन दर्शन से होगा मानव धर्म विकास पश्चिम के असफल चिंतन का शनैः शनैः हो ह्रास… करवट बदल रहा है ग्रीक मिटे यूनान मिट गये भरतभूमि है अविनाशी आदि अनादी अनंत राष्ट्र है संस्कृति शुचिता अभिलाषी भोगवाद के महल ढह रहे बदल रहा इतिहास बुझl सके हिन्दुत्व सुधा ही अब वसुधा की प्यास… करवट बदल रहा है सत्रह बार क्षमा अरिदल को ऐसी भूल न अब होगी कोटि कोटि बाहोंवाली माँ ना अबला कहलाएगी देश विघातक षडयंत्रो का निश्चित निकट विनाश एक अखंडित भारत देगा अनुपम विमल प्रकाश करवट बदल रहा है देखो भारत का इतिहास संघवृक्ष शाखा उपशाखा दसों दिशा में फ़ैल रही हिन्दुराष्ट्र की विजय पताका लहर लहर ललकार रही केवल सत्ता से मत करना परिवर्तन की आस जागृत जनता के केन्द्रों से होगा अमर समाज करवट बदल रहा है देखो भारत का इतिहास जाग उठा है हिन्दु ह्रदय में विश्व विजय विश्वास करवट बदल रहा है देखो भारत का इतिहास

हम प्रेम से सबको जोड़ेंगे, मर्यादा को नहीं तोड़ेंगे

हम प्रेम से सबको जोड़ेंगे, मर्यादा को नहीं तोड़ेंगे। संकट कैसा भी विकट घना, कर्तव्य डगर ना छोड़ेंगे ।।  है प्रेम-प्रभु गहरा नाता, अविरल अमृत रस छलकाता। आनंद लहर लहराते है, सत पथ से मुख ना मोड़ेंगे ।। 1।।  है प्रेम-सुखद जीवन धारा, हरती है द्वेष क्लेश सारा। आदर्शों के हम अनुगामी, मृदु सत्य वचन ही बोलेंगे ।। 2।।  है प्रेम-प्रेरणा का सागर, करुणा से अपनी भर गागर। हर प्राण-प्राण हर कण कण में, उत्साह उमंगे घोलेंगे ।। 3।।  है प्रेम-एकता की जननी, अनुपम वैविध्य लिए धरणी। दिव्यांश सभी में जग मग जग, वैभव के नव पथ खोलेंगे ।। 4।।

नित्य करें धरती मां वन्दन, मातु पिता गुरुवर अभिनंदन

नित्य करें धरती मां वन्दन, मातु पिता गुरुवर अभिनंदन, सेवा धरम चले अविराम।-१  श्री राम जय राम जय जय राम-३ चुन चुन कर निज दोष हटायें,  अपना दिव्य रुप प्रगटायें, परहित के हम आयें काम।-२ श्री राम जय राम जय जय राम-३ हे प्रभु हमको ऐसा वर दो, जीवन त्याग तपोमय कर दो, सदा करें हम राम का काम।-३ श्री राम जय राम जय जय राम-३ दया धर्म के सागर हों हम, प्रेम हमारा कभी ना हो कम, तव चरणों में हो विश्राम।-४ श्री राम जय राम जय जय राम-३ अब राम भक्त में भी है दम ख़म, मंदिर भव्य बनायेंगे हम, सदा करे हम संघ का काम।-५ श्री राम जय राम जय जय राम-3

जीवन में सुख दुख का,आना जाना नित्य चले

जीवन में सुख दुख का,आना जाना नित्य चले आना जाना सतत चलें ।। ध्रु.।। हम अपना चैतन्य जगाएं,हम अपना सामर्थ बढ़ाएं। हम अपना कर्तव्य निभाएं,घर-घर मंगल दीप जले। हर घर मंगल दीप जले।। १।। सुख में लिप्त नहीं होना,दुःख में हिम्मत न खोना। धीर-वीर गंभीर बने हम,सारे संकट विघ्न टले।।२।। सुख में भी सब को जोड़ें,दुःख में साथ नहीं छोड़ें। सुख दुःख की समवेत शक्ति से,अपने सब उद्योग फले।।३।। सुख में न जागे अभिमान,दुःख में न भूले निजभान। अच्छा मारग कभी न त्यागे,धर्म का मारग कभी न त्यागे। धर्म का मारग कभी न त्यागे,अनगिन आये कष्ट भले।।४।। सुख में सुंदर देख गगन,दिव्य भास्कर दिव्य किरण। धरती वायु पावन जल से,युग- युग से सब जीव पले।।५।।

भरत भूमि की दशो दिशा में, समरसता का गान हो

  भरत भूमि की दशो दिशा में, समरसता का गान हो  एक ही मंदिर, एक जलाशय, सबका एक श्मशान हो  समरसता का गान हो .............................. ......... हिन्दू सगे है भाई-भाई, कभी पतित नहीं होते है  रामकृष्ण के वंशज है सब इस पर गर्वित होते है  छुआछूत का भेद मिटा दे, सब वर्गों का मान हो एक ही मंदिर, एक जलाशय, सबका एक श्मशान हो  समरसता का गान हो .............................. ......... छुआछूत यदि पाप नहीं तो, जग में कुछ भी पाप नहीं  हिन्दू सहोदर भटक गया तो, इससे बड़ा अभिशाप नहीं  मान जिनका भांग हुआ हो, अब उनका सम्मान हो  एक ही मंदिर, एक जलाशय, सबका एक श्मशान हो  समरसता का गान हो .............................. ......... नर सेवा नारायण सेवा, मन्त्र का जग में गुंजन हो  समरसता का भाव पले, एकलव्य का वंदन हो  कृष्ण सुदामा के घर आये, इसका हमें अभिमान हो  एक ही मंदिर, एक जलाशय, सबका एक श्मशान हो  समरसता का गान हो .............................. .........

धर्म के लिये जिये समाज के लिये जिये

  धर्म के लिये जिये समाज के लिये जिये ये धडकने ये श्वास हो पुण्यभूमी के लिये जन्मभुमि के लिये ॥धृ॥   गर्व से सभी कहे हिन्दु है हम एक है जाति पंथ भिन्नता स्नेह सूत्र एक है शुभ्र रंग की छटा सप्त रंग है लिये ॥१॥   कोटि कोटि कन्ठ से हिन्दु धर्म गर्जना नित्य सिद्ध शक्ति से मातृभू की अर्चना संघ शक्ति कलियुगे सुधा है धर्म के लिये ॥२॥   व्यक्ति व्यक्ति मे जगे समाज भक्ति भावना व्यक्ति को समाज से जोडने की साधना दाव पर सभी लगे धर्म कार्य के लिये ॥३॥   एक दिव्य ज्योति से असंख्य दीप जल रहे कौन लो बुझा सके आंधियो मे जो जले तेजःपुंज हम बढे तमस चेरते हुए ॥४॥  

हमको अपनी भारत की माटी से अनुपम प्यार है ।

हमको अपनी भारत की माटी से अनुपम प्यार है ।  माटी से अनुपम प्यार है । माटी से अनुपम प्यार है ।  इस माटी पर जन्म लिया था, दशरत नंदन राम ने ।  इस माटी पर गीता गायी, युद्धकुल भूषण श्याम ने ।  इस माटी के आगे झुकता, मस्तक बारम्बार है ।।  हमको अपनी_ _ _ _ _ _ _ _  इस माटी की गौरव गाथा गायी राजस्थानी ने ।  इसे बनाया वीरो ने, अपने पवन बलिदान से ।  मीरा के गीतों की, इसमें छिपी हुई झंकार हे ।।  हमको अपनी _ _ _ _ _ _ _ _ _ _ _  कण - २ मंदिर इस माटी का कण - २ में भगवान है ।  इस माटी का तिलक करो, यह मेरा हिंदुस्तान है ।  इस माटी का रोम रोम पहरे दार है ।।  हमको अपनी _ _ _ _ _ _ _ _ _